मंगलवार, 29 जून 2021

चक्रवात किसे कहते हैं

       चक्रवात किसे कहते हैं






 चक्रवात का समान्य अर्थ है  चक्करदार हवाओं से है | यह एक न्यूनतम वायु भार का ऐसा क्षेत्र होता है | जिसके  केंद्र से बाहर की ओर वायुदाब क्रमश: बढ़ता जाता है | इसकी समभार रेखाएं संकेंद्रीय होती है जिसके कारण परिधि से केंद्र की ओर हवाएं चलने लगती है | उत्तरी गोलार्ध में चक्रवात मे वायु की दिशा घड़ी की  सुई की विपरीत तथा दक्षिणी गोलार्ध में घड़ी की  सुई की दिशा में घूमती हुई न्यूनतम भार वाले केंद्र की ओर पहुंचती है |

 स्थिति के दृष्टिकोण से चक्रवातो को दो वर्गों में बांटा गया है

                  शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात

 वैसे चक्रवातीय  वायु प्रणालीयाँ जो  उष्ण  कटिबंध से दूर मध्य व उच्च अक्षांशो में विकसित होती है | उसे शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात कहा जाता है  इसके केंद्र  तथा बाहर की ओर स्थित दाब में 10 से 20 mb  तथा कभी-कभी 35 mb  का अंतर होता है इसका भ्रमण  तथा पछुआ  पवनों के सहारे पश्चिम से पूर्व दिशा में होता है | जाड़े  के समय में इसकी गति भी तीव्र हो जाती है | चक्रवातो  में  समदाब दिखाओ की आकृति अंडाकार या उलटे V  आकार  के होते हैं |  इस के आगमन की सूचना पक्षाभ व पक्षाभ स्तरी मेघों के कारण सूर्य के चारो ओर बने प्रभामण्डल  से मिलती है |इस  चक्रवात के उत्तरी गोलार्ध में उत्पत्ति के दो मुख्य केंद्र  

    (i)  उत्तरी अमेरिका का उत्तर - पूर्वी तटीय भाग

    (ii)  एशिया का उत्तर - पूर्वी तटीय भाग

                       उत्पत्ति एवं जीवन चक्र  

 इसकी उत्पत्ति  का संबंध वाताग्रो  से होता है | जहां पर दो हवाओं के मिलने से इसकी उत्पत्ति होती है | इसकी उत्पत्ति के संबंध में बर्कनीज का  ध्रुवीय वाताग्र सिद्धांत  सर्वाधिक मान्य है | जिसके जीवन चक्र की छह क्रमिक अवस्थाएं है |

 प्रथम अवस्था में ठंडी व गर्म वायुराशियाँ एक दूसरे से समानांतर चलती है जिससे स्थाई वाताग्र का निर्माण  होता है |

 दूसरी अवस्था में दोनों वायु राशियां  एक दूसरे के प्रदेश में प्रविष्ट करने  का प्रयास करते हैं जिससे  लहरनुमा वाताग्र  का निर्माण होता है |

 तीसरी अवस्था में उष्ण और शीत वाताग्रो का पूर्ण विकास  होता है | इसमें चक्रवात का पूर्ण रूप प्राप्त हो जाता है |

 चौथी अवस्था में स्थित वाताग्र  के तेजी से आगे बढ़ने के कारण उष्ण वृतांश संकुचित होने लगता है |

 पांचवी अवस्था में चक्रवात का अवसान होना शुरू हो जाता है |

 छठी अवस्था में चक्रवात का अंत (अवसान )  हो जाता है |

                     उष्णकटिबंधीय चक्रवात

 कर्क रेखा व मकर रेखा के मध्य उत्पन्न होने वाले चक्रवातो को  उष्णकटिबंधीय चक्रवात कहा जाता है | अक्षांशों के मौसम खासकर  वर्षा पर इन चक्रवातों का  पर्याप्त प्रभाव होता है | उष्णकटिबंधीय चक्रवातो  की ऊर्जा  का मुख्य स्रोत संघनन की गुप्त ऊष्मा होती है |

 इसकी आकृति सामान्यतः वृत्ताकार या अंडाकार होती है | लेकिन इसमें  समदाब रेखाओं की संख्या बहुत कम होती है   उष्णकटिबंधीय चक्रवातो  की गति 32 किमी प्रति घंटा से 120 किमी प्रति घंटा होती है | उष्णकटिबंधीय चक्रवातो की सदैव गतिशील नहीं होती  कभी-कभी एक ही स्थान पर कई दिनों तक वर्षा करती है | साधारणत:  ये व्यापारिक पवनों के साथ पूर्व से पश्चिम दिशा में अग्रसर होता है | सागरो  के ऊपर इन चक्रवातो  की गति तीव्र होती है | परंतु स्थल तक पहुंचने में क्रम में  यह कम होने लगती है यही कारण है | कि यह केवल तटीय क्षेत्रों को प्रभावित करती है |



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