वर्षण किसे कहते है
वर्षण निम्म प्रकार की होती है
(1) फुहार
इस प्रकार के वर्षण में बूंदो का आकार काफी छोटा है लेकिन वर्षा सघन होती है |
( 2 ) सहिम वर्षा
यदि वर्षण के फलस्वरूप जल बूंदों के साथ-साथ अर्ध्द हिमित या हिमित कणो की भी वर्षा हो तो उसे सहिम वर्षा कहा जाता है |
(3) हिमपात
यदि वर्षणके फलस्वरूप हिमकणों की वर्षा होती है | तो उसे हिमपात कहा जाता है | ऐसा तब होता है | जब संघनन जमाव विन्दु से निचे होता है | जिसके कारण वाष्प से हिम के छोटे छोटे कण बन जाता है | सामान्यतः ये छोटे छोटे कण आपस में मिल जाता है | और विभिन्न आकारों में गिरता है जिसे हिमपात कहा जाता है |
( 4 ) ओलावृष्टि
यदि वर्षण के फलस्वरूप हीम - गोले बन जाता है | तो उन्हें ओले तथा भू पृष्ठ पर इसके गिरने को ओलावृष्टि कहा जाता है |
( 5 ) ओस
वनस्पति तथा अन्य वस्तुओं के ऊपर जलकण के रूप में संग्रहित आर्द्रता को ओस कहा जाता है रात में पार्थिव विकिरण के कारण तापमान में कमी आती है | जिससे वायुमंडल की निचली परतो का तापमान को ओसांक बिंदु से नीचे चला जाता है | तथा संघनन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है | इस प्रकार संघनन द्वारा उत्पन्न जल पौधे तथा अन्य वस्तुओं के ऊपर जलकण के रूप में एकत्रित हो जाता है |
(6) तुषार
जब कभी तापमान हिमांक बिंदु से नीचे चला जाता है तब तुषार का निर्माण होता है |
( 7) कुहासा
कुहासा का निर्माण आर्द्र सतह झील तथा नदियों के ऊपर होता है | कुछ आर्द्रता वाले क्षेत्र में शाम के समय संघनन की प्रक्रिया के कारण आसपास के क्षेत्रों तथा जल पिंडों के ऊपर शरण स्थलों पर कुहासा का निर्माण होता है |
( 8 ) कोहरा
कुहासा के कारण जब दृश्यता एक किलोमीटर तक ही रह जाती है | तो इस अवस्था को कोहरा कहा जाता है | कोहरे का निर्माण शीतलीकरण एवं वाष्पीकरण दोनों प्रक्रिया के कारण होता है |

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