वायुदाब क्या है
वायुमंडल में उपस्थित गैसों में एक निश्चित भार होता है | इस गैसों द्वारा पृथ्वी पर पड़ने वाली दबाव को वायु दाब कहा जाता है | अर्थात प्रति इकाई क्षेत्रफल पर गैसो द्वारा पड़ने वाले बल को वायु दाव कहा जाता है |
वायुदाब को बैरोमीटर में मापा जाता है | जलवायु वैज्ञानिकों ने इसके लिए मिली बार को इकाई माना है | एक मिली बार 1 वर्ग सेमी पर गैस के 1 ग्राम भार का बल है | बैरोमीटर के पारा का पहले गिरना फिर धीरे-धीरे बढ़ना वर्षा की स्थिति का परिचायक है | बैरोमीटर में पारा का ऊपर की ओर बढ़ना प्रति चक्रवातिय और साफ मौसम का संकेत देता है | वायुदाब के वितरण को समदाब रेखा द्वारा दर्शाया जाता है | समदाब रेखा वह कल्पित रेखा है | जो सम्मान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाती है | वायुदाब को मौसम के पूर्वानुमान का एक महत्वपूर्ण सूचक माना जाता है |
वायुदाव पेटियाँ
धरातल पर वायुदाब की कुल सात आदर्श पेटियां है | उसमें से चार उच्च दाब की बेटियां और तीन न्यून दाब की पेटियां है |
विषुवत रेखीय निम्न वायुदाब पेटी
विषुवत रेखा के नजदीक 5° उत्तर और दक्षिण के बीच भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब पेटी पाई जाती है | यहां वर्ष भर सूर्य की सीधी किरणे पड़ती है | जिसके कारण तापमान हमेशा ऊंचा रहता है |जिसके फलस्वरूप यहां वायुदाब मिल पाई जाती है | इस पेटी मैं दोनों गोलार्ध से चलने वाली व्यापारिक हवाओं का अभिसरण भी होता है | तथा धरातल पर वायुदाब शांत अथवा हल्की तथा निश्चित दिशा से चलती है | जिसके कारण इस पेटी को डोलड्रम्स कहा जाता है | सूर्य के उत्तरायण अथवा दक्षिणायण होने के साथ साथ ही यह पेटी क्रमशः उत्तर अथवा दक्षिण की ओर विस्थापित हो जाती है |
उप ध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी
उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्ध के 60° से 65° के मध्य विकसित वायुदाब पेटी को उप ध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी कहा जाता है | यहां वर्ष भर तापमान कम होता है | इसके बावजूद भी यहां निम्न वायुदाब पेटी का निर्माण होता है | अतः हम कह सकते हैं कि इस पेटी का संबंध तापमान से नहीं है |
वास्तव में पृथ्वी के घूर्णन गति के कारण इन अक्षांशों से वायु फ़ैल कर स्थानांतरित हो जाती है | जिसके कारण गति कम वायुदाब का आभास होता है |
उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी
उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्ध के 30° से 35° अक्षांश के मध्य विकसित वायुदाब पेटी को उच्च वायुदाब पेटी कहा जाता है | इस पेटी के क्षेत्र में शीत काल के दो माह को छोड़कर वर्ष भर ऊंचा तापमान रहता है | इसके बावजूद यहां उच्च वायुदाब पेटी का निर्माण होता है | जबकि नियमतः यहां निम्न वायुदाब होना चाहिए |
अतः इसका संबंध तापमान से ना होकर पृथ्वी की दैनिक गति तथा वायु के अवतलन से संबंधित है | भूमध्य रेखा से उठी वायु तथा उप ध्रुवीय निम्न वायुदाब की वायु इन अक्षांशो में नीचे उतर कर बैठती है | जिसके कारण वायुदाब अधिक हो जाता है | उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी को अश्व अक्षांश भी कहा जाता है |
ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी
ध्रुव वृतो से ध्रुवों की ओर जाने पर वायुदाब बढ़ता जाता है | ध्रुवों के निकट उच्च वायुदाब का एक विशेष क्षेत्र बन जाता है | जिस प्रकार विषुवत रेखा के निकट निम्न वायुदाब के कारण तापमान की अधिकता है | उसी प्रकार ध्रुवों के समीप उच्च वायुदाब का कारण तापमान के न्यूनता है |

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