पृथ्वी क्या है? पृथ्वी के बारे में वर्णन करें
पृथ्वी सौरमंडल में विद्यमान सभी ग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण है | क्योंकि केवल पृथ्वी पर ही जीवन संभव है | इसके अलावा यहां स्थल एवं जल का वितरण तथा क्रमिक ऋतु परिवर्तन के कारण पृथ्वी को एक विशिष्ट ग्रह बनाने में मदद करता है | इसकी घूर्णन तथा परिक्रमण गति समस्त जीवन का मूल आधार है |
पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई
पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में सर्वप्रथम तर्कपूर्ण परिकल्पना का प्रतिपादन फ्रांसीसी वैज्ञानिक कास्ते द बफन ने 1749 ई. मे किया था | इसके उत्पत्ति के संबंध में वैज्ञानिकों ने 2 वर्गों में बांट कर जानकारी दी है |
( 1 ) अद्वैतवादी संकल्पना
( 2 ) द्वैतवादी संकल्पना
( 1 ) अद्वैतवादी संकल्पना
अद्वैतवादी संकल्पना के अनुसार ग्रहों तथा पृथ्वी की उत्पत्ति केवल एक ही वस्तु ( तारा ) से बनी हुई मानी जाती है |
( 2 ) द्वैतवादी संकल्पना
द्वैतवादी संकल्पना के अनुसार ग्रहों तथा पृथ्वी की उत्पत्ति एक से अधिक खास कर दो तारों के सहयोग से हुई है |
अतः पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में कोई एकमत नहीं है | फिर भी ऐसा माना जाता है , कि प्रारंभ में पृथ्वी चट्टानी गर्म एवं विरान ग्रह थी | इसका वायुमंडल भी विरल था | जो हाइड्रोजन एवं हीलियम से बना था | और आज के वायु मंडल से बिल्कुल भिन्न था | अतः ऐसा माना जाता है कि यहां अनेक ऐसी घटनाएं एवं क्रियाएं हुए जिसके कारण यह एक सुंदर ग्रह में परिवर्तित हो गया | ऐसा माना जा रहा है कि पृथ्वी पर जीवन का विकास 460 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ |
पृथ्वी की गतियां
पृथ्वी सूर्य से दूरी के अनुसार तीसरा तथा आकार में पांचवा बड़ा ग्रह है | यह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर 1610 किमी प्रति घंटा की चाल से घूमती है पृथ्वी 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड में एक पूरा चक्कर लगाती है |
पृथ्वी की गति दो प्रकार की होती है |
(1) घूर्णन गति
( 2 ) परिक्रमण गति
(1) घूर्णन गति
पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है | जिसे घूर्णन गति कहा जाता है |
( 2 ) परिक्रमण गति
पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक स्थिर कक्षा में गति करती है जिसे परिक्रमण गति कहा जाता है |
पृथ्वी की इन दोनों गतियों के कारण ही हैं | दिन-रात एवं ऋतु परिवर्तन होता है | पृथ्वी का अपने अक्ष पर झुकाव भी ऋतु परिवर्तन का एक प्रमुख कारण माना जाता है | पृथ्वी के अपने अक्षों पर परिक्रमण गति के कारण अलग-अलग ऋतुओं में दिन व रात की अवधि में अंतर होती है |
पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड का समय लगता है |
पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करने में जो समय लगता है |उसे सौर वर्ष कहा जाता है | प्रत्येक सौर वर्ष कैलेंडर वर्ष से लगभग 6 घंटा बढ़ जाता है | जिसे हर चौथे वर्ष में लीप वर्ष बनाकर समायोजित किया जाता है | जिसके कारण लीप वर्ष 366 दिन का हो जाता है | और उस लीप वर्ष में फरवरी माह 28 दिन के स्थान पर 29 दिन होता है |
पृथ्वी का परिक्रमण तथा ऋतुएँ
21 जून को उत्तरी ध्रुव और 22 दिसंबर को दक्षिणी ध्रुव सूर्य की ओर झुका होता है | 21 मार्च और 23 सितंबर को कोई भी ध्रुव सूर्य की ओर झुका नहीं होता है | 21 जून वाली स्थिति को ग्रीष्म अयनांत कहा जाता है | तथा 22 दिसंबर वाली स्थिति को शीत अयनांत कहा जाता है | अर्थात मकर संक्रांति कहा जाता है क्योंकि इस तिथि के बाद सूर्य उत्तर की ओर यात्रा प्रारंभ कर देता है जिसे उत्तरायण भी कहा जाता है | जो छह मास का होता है |
जब 21 मार्च और 23 सितंबर को कोई भी ध्रुव सूर्य की ओर झुका नहीं होता है | तो दोनों गोलार्ध में दिन रात 12 घंटे के होते हैं | अर्थात दिन व रात बराबर होता है जिसे विषुव कहा जाता है | 21 मार्च को वसंत विषुवत कहा जाता है | तथा 23 सितंबर को शरद विषुव कहा जाता है |
3 जनवरी को सूर्य पृथ्वी के काफी नजदीक रहता है जिसके कारण 3 जनवरी को उपसौर कहा जाता है | जबकि 4 जुलाई को सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सर्वाधिक होती है | जिसके कारण 4 जुलाई की स्थिति को अपसौर कहा जाता है |
पृथ्वी का कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
पृथ्वी का संपूर्ण धरातलीय क्षेत्रफल 510066100 किमी
पृथ्वी के स्थल का क्षेत्रफल 14.89 करोड़ किमी
पृथ्वी का आयतन 1.08321×10^12 किमी
पृथ्वी की सतह का औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस
पृथ्वी का औसत घनत्व 5.53 ग्राम/ सेमी
पृथ्वी का विषुवतीय परिधि 40076 किमी
पृथ्वी का ध्रुवीय परिधि 40008 किमी
पृथ्वी के अक्ष का कक्षा तल पर झुकाव 23.5°
पृथ्वी के अक्ष का कक्षा तल पर कोण 66.5°
पृथ्वी की घूर्णन अवधि 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड
पृथ्वी की परिक्रमण अवधि 365 दिन 6 घंटे

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